卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐
दिनांक - 11 अप्रैल 2026
दिन - शनिवार
विक्रम संवत् - 2083
अयन - उत्तरायण
ऋतु - वसंत
मास - वैशाख
पक्ष - कृष्ण
तिथि - नवमी मध्यरात्रि 12:37 तक तत्पश्चात् दशमी
नक्षत्र - उत्तराषाढा दोपहर 01:39 तक तत्पश्चात् श्रवण
योग - सिद्ध शाम 06:39 तक तत्पश्चात् साध्य
राहुकाल - सुबह 09:19 से सुबह 10:54 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
सूर्योदय - 06:10
सूर्यास्त - 06:46 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)
दिशा शूल - पूर्व दिशा में
ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:39 से प्रातः 05:24 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:03 से दोपहर 12:53 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:05 से मध्यरात्रि 12:50 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)
व्रत पर्व विवरण - सर्वार्थसिद्धि योग (दोपहर 01:39 से प्रातः 06:09 अप्रैल 12 तक)
विशेष - नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है।
शनिवार के दिन विशेष प्रयोग
शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है।
हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है।
आर्थिक कष्ट निवारण हेतु
एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र जपते हुए पीपल की 7 बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है।
अकाल मृत्यु व घर में बार बार मृत्यु होने पर
जिसे मौत का भय होता है या घर में मौतें बार-बार होती हों, तो शनिवार को "ॐ नमः शिवाय" का जप करें और पीपल को दोनों हाथों से स्पर्श करें। 108 बार जप करें तो दीर्घायु का लाभ होता है। ऐसा 10 शनिवार या 25 शनिवार करें, नहीं तो कम से कम 7 शनिवार अवश्य करें।
विघ्न-बाधाओं व दुर्घटना से बचने का उपाय
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।
रोज सुबह उठने पर अथवा घर से बाहर जाते समय एक बार इस मंत्र का जप करने से विघ्न-बाधा और दुर्घटनाओं से बचाव में सहायता मिलती है।